सुरीर में किसानों से करार किए बगैर गंगाजल परियोजना के लिए शुरू हुए कब्जे का विरोध, आंदोलन की चेतावनी

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सुरीर के गांव कराहरी में वुधवार को बिना करार किए जमीन पर पाइप लाइन डालने के लिए कब्जा करने पर विवाद खड़ा हो गया। किसानों ने उत्पीड़न का आरोप लगाते जमीन पर किए जा रहे कब्जे का विरोध किया। बुलन्दशहर से आगरा तक गंगाजल परियोजना के लिए पाइप लाइन बिछाने का कार्य प्रगति पर है। गांव कराहरी में शैलेन्द्र सिंह, सतेंद्र सिंह, पवन कुमार, सतीश कुमार एवं सुधीर कुमार की 465 मीटर लंबी जमीन आ रही है। जिसमें 38 फलदार समेत 60 पेड़ खड़े हैं। फलदार पेड़ों के मुअवाजे के लिए कंपनी और किसानों के मध्य काफी दिनों से बातचीत चल रही है। फलदार पेड़ों का उचित मुआवजा देने से किसानों ने अपनी जमीन का करार नहीं किया है। इसको लेकर कई बार प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कंपनी और किसानों की बैठक भी हुई लेकिन पेड़ों के मुआवजे को लेकर यह किसान संतुष्ट नहीं हैं। इसके बावजूद वुधवार को पाइप लाइन डालने का कार्य कर रही कंपनी ने पुलिस की मौजूदगी में इनकी जमीन पर कब्जा करने के लिए जेसीबी मशीन चलानी शुरू कर दी। बिना करार के खेत में खड़ी गेंहू और सरसों की फसल को जेसीबी से रौंदते देख किसान भड़क गए और उन्होंने इसका विरोध करना शुरू कर दिया।

जिसे देख वहां मौजूद पाइप लाइन मेघा कंपनी के इंजीनियर विनोद चौधरी एवं गंगाजल परियोजना के इंजीनियर भूपेंद्र चौधरी, अभिषेक पंत एवं रमेश ठाकुर ने उत्तेजित किसानों को शांत करते हुुुए भरोसा दिलाया कि वह मुआवजा तय होने के बाद ही पेड़ों को काटेंगे लेकिन तब तक उससे आगे-पीछे के जमीन पर कार्य कर रहे हैं। पुलिस ने भी एसडीएम मांट के आदेश का हवाला देते हुए कार्य होने देने के लिए किसानों को समझाया।

जबकि किसानों का कहना है कि जब तक पेड़ों का उचित मुआवजा एवं जमीन का करार नहीं होता तब तक वह अपनी एक इंच जमीन पर कब्जा नहीं होने देंगे।  उनके साथ जोर जबरदस्ती की तो वह परिवार समेत धरना-प्रदर्शन एवं आंदोलनात्मक कदम उठाने को मजबूर होंगे।तो नियो न्यूज द्वारा गंगा जल प्रोजेक्ट के अधिकारियों से बात की तो उन्होंने कैमरे के सामने बोलने से मना कर दिया।

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