तीन तलाक संबंधी बिल शरीयत, संविधान और महिला विरोधी, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की संसद में पेश न करने की सरकार से अपील

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( योगेश खत्री )
लखनऊ 24 दिसंबर।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने आगामी 26 दिसंबर को संसद में पेश किए जाने वाले तीन तलाक बिल का विरोध करते हुए इसे महिला विरोधी बताया है। बोर्ड के अनुसार यह बिल शरीयत और संविधान दोनों के खिलाफ है। इसलिए इसे संसद में न पेश किया जाए।

तीन बार “तलाक, तलाक, तलाक” कह देने मात्र से होने वाले तलाक को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवैध करार दिए जाने के बाद केंद्र सरकार इस पर कानून लाने जा रही है। इस संबंध में मौजूदा संसद सत्र में 26 दिसंबर को बिल पेश किया जाएगा, जिसका ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने रविवार को कड़ा विरोध किया।

इस संबंध में आयोजित मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की वर्किंग कमेटी की आपात बैठक में बिल को लेकर गंभीर चर्चा की गई। कई घंटे चली बैठक के बाद बिल को खारिज किए जाने का प्रस्ताव पारित किया गया।

बैठक के बाद अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोर्ड ने तीन तलाक बिल को महिलाओं की आजादी में दखल करार देते हुए महिला विरोधी बताया।

बोर्ड ने इस बिल को संसद में पेश न करने की सरकार से अपील की और कहा कि वह इस संबंध में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन प्रेषित करेगा।

आपात बैठक में वर्किंग कमेटी के सभी 51 सदस्य बुलाए गए थे। बैठक में बोर्ड अध्यक्ष मौलाना राबे हसनी नदवी, महासचिव मौलाना सईद वली रहमानी, सेक्रेटरी मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी, खलीलुर्रहमान सज्जाद नोमानी, मौलाना फजलुर रहीम और मौलाना सलमान हुसैनी नदवी भी मौजूद रहे।

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