जहाँ विराजें तुलसी माता, वहाँ यमराज भी नहीं आते !

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(रवि यादव)

भारतीय धर्म संस्कृति में तुलसी माता का स्थान अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण है। यह मां के समान हमारा पोषण करती है। तुलसी के पूजन से बुद्धि बल.. मनोबल… चरित्र बल ….बढ़ता है। साथ ही व्यक्ति निरोगी भी रहता है। तुलसी पूजन की सबसे खास बात यह है कि व्यक्ति नकारात्मक नहीं सोचता।

माना जाता है कि यदि कोई इंसान अपने जीवन में आत्महत्या के बारे में ज्यादा सोचने लग जाए और ऐसा इंसान माता तुलसी की पूजा करने लग जाए तो यह है दोष उसके दिमाग में कभी नहीं आता। पूजन मानसिक अवसाद को दूर करता है।

स्कंद पुराण में तो यहां तक कहा गया है कि जिस घर में तुलसी का पौधा होता है अथवा तुलसी का पूजन होता है, वहां यमराज भी प्रवेश नहीं करते। तुलसी का पौधा सर्वाधिक शुद्ध पवित्र होता है और यह प्रदूषित वायु को शुद्ध करता है। वैद्य, हकीम बताते हैं कि तुलसी पौधे के यदि कुछ पत्ते रोज चबाए जाएं तो याददाश्त बढ़ती है और गुर्दे भी सही कार्य करते हैं।

भारतीय परंपरा में तो जब कोई व्यक्ति इस दुनिया से विदा हो जाता है यानि मृत हो जाता है तो उसके मुख में तुलसी जल डाला जाता है। कहा जाता है कि ऐसा करने से वह मनुष्य सीधे परलोक जाता है। उसे ईश्वर का निवास मिलता है। 25 दिसंबर को भारतीय हिंदू सभ्यता के मानने वाले लोग पूजन दिवस के रुप में मनाते हैं क्योंकि तुलसी का पौधा एक पौधा न होकर हिंदू संस्कृति में माता का स्वरूप माना गया हैl

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