आधार को मोबाइल से लिंक कराने की अनिवार्यता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

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मोबाइल नंबर को आधार कार्ड से लिंक करने की अनिवार्यता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है. याचिका तहसीन पूनावाला ने दाखिल की है. याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट दूर संचार मंत्रालय के 23 मार्च 2017 के नोटिफिकेशन को अवैध घोषित कर रद्द करे क्योंकि ये ना केवल संविधान के खिलाफ है बल्कि मनमाना, विकृत और कानून के सिद्धांत के विरुद्ध भी है. इससे संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 से मिले नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन भी हो रहा है.

मोबाइल नंबर वेरिफिकेशन के लिए आधार कार्ड जरूरी

सुप्रीम कोर्ट में इससे पहले भी मोबाइल नंबर को आधार कार्ड से अनिवार्य रूप से लिंक करने को चुनौती देने वाली एक याचिका दाखिल हुई थी. वकील राघव तन्खा ने सुप्रीम कोर्ट में ये नई याचिका दायर कर दूरसंचार मंत्रालय के 16 अगस्त 2016 और 23 मार्च 2017 की अधिसूचना की वैधता को चुनौती दी है. इस नोटिफिकेशन से मंत्रालय ने पुराने मोबाइल नंबर के वेरिफिकेशन के लिये और नया मोबाइल नंबर लेने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य कर दिया है.

‘केंद्र ने की कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या’

याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने लोकनीति फाउंडेशन मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानबूझ कर गलत व्याख्या की है. SC के उस आदेश पर केंद्र सरकार ने कहा कि कोर्ट ने आदेश दिया है, पुराने मोबाइल नंबर के वेरिफिकेशन के लिये और नए मोबाइल नंबर लेने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य किया जाए, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में ऐसा कुछ नहीं कहा था.

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए मोबाइल नंबर का वेरिफिकेशन

याचिका में कहा गया है कि लोकनीति फाउंडेशन के मामले में सुप्रीम ने अपने आदेश में केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मोबाइल नंबर का सत्यापन कराया जाए. जबकि केंद्र सरकार ने कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि आधार कार्ड अनिर्वाय नहीं है. हालांकि केंद्र सरकार ने ये भी कहा था कि आधार कार्ड के जरिये सत्यापन आसानी से होता है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आधार कार्ड के जरिये ही पुराने मोबाइल नंबर का सत्यापन और नया मोबाइल नंबर मिल सकता है.

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