मथुरा जेल से 7 साल बाद फिर भागे बंदी, जानिए कैसे लाँघी दीवार, डीआईजी ने आकर शुरू की जाँच, 4 सुरक्षाकर्मी किए निलंबित

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मथुरा जेल से 7 साल बाद फिर भागे बंदी, जानिए कैसे लाँघी दीवार, डीआईजी ने आकर शुरू की जाँच, 4 सुरक्षाकर्मी किए निलंबित

योगेश खत्री
मथुरा 1 जनवरी 2018 ।
नया साल तो जिला कारागार में निरुद्ध 3 बंदियों ने मनाया, जो नव वर्ष के लगते ही खुद को बंधन मुक्त करते हुए जेल से भाग खड़े हुए। उनके साथ एक अन्य बंदी ने भी भागने का प्रयास किया मगर वह सफल नहीं हो सका।

बंदियों के भागने की सूचना मिलते ही डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी सोमवार दोपहर मथुरा जिला कारागार आ गए, जिन्होंने घटना की प्रारंभिक जांच के दौरान एक प्रधान बंदीरक्षक सोनवीर सिंह, बैरक प्रभारी अभयराम, दीवार की गश्त पर तैनात बंदीरक्षक विजय सिंह और गश्त निरीक्षक बंदीरक्षक हीरेंद्र को प्रथमदृष्टया दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया है।

मिली जानकारी के अनुसार भागे बंदियों के नाम कलुआ, संजय और राहुल कुशवाह हैं। इनमें से कलुआ किशोरपुरा वृंदावन का रहने वाला है, जिसे वृंदावन पुलिस ने 7 मई 2017 को मादक पदार्थ रखने के आरोप में गिरफ्तार करके जेल भेजा था। दूसरा भागा बंदी अछनेरा आगरा का रहने वाला संजय है, जिसे फरह पुलिस ने लूट की धारा 393 और 411 आदि के तहत 29 अगस्त 2015 को गिरफ्तार करके जेल भेजा था। तीसरा भागा बंदी हथौड़ा जलेसर का रहने वाला राहुल कुशवाह थाना बलदेव पुलिस द्वारा 20 मई 2016 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। उस पर गैंगस्टर आदि के 5 मुकदमे हैं।

यह चारों बंदी 18 से 21 वर्ष की आयु वाले बंदियों की 17 नंबर बैरक में निरुद्ध थे, जिसकी करीब 15 फुट ऊंची दीवार पर 3 बंदियों ने डंडियों के सहारे चढ़कर उन्होंने सीमेंटेड छत काटी और फिर जेल की 18 फुट ऊंची दीवार पर भी डंडियों के सहारे चढ़कर बाहर कूद गए।

इनके अलावा एक अन्य बंदी, जिसने और भागने का प्रयास किया, उसका नाम भी राहुल है। वह ग्वालियर का रहने वाला है। भागते के प्रयास में समय दीवार से गिर जाने के कारण उसके पैर में चोट आ गई, जिससे वह भाग नहीं सका। इसी मध्य गश्त को चेक करने वाला बंदीरक्षक हीरेंद्र वहां आ गया, जिसे कैदियों के भागने का तत्काल पता चल गया।

जेल अधीक्षक संजय मैत्रेय
के अनुसार यह घटना रात्रि करीब 1:30 बजे से 1:50 बजे के मध्य हुई, जिसकी सूचना उन्हें 1:56 बजे मिल गई। उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचित करते हुए स्वयं अपने फोर्स के साथ जवाहर बाग तक दौड़ भागकर भागे बंदियों की खोज की। लेकिन रात्रि में कोहरा अधिक होने के कारण उनका कहीं सुराग नहीं लगा।

डीआईजी जेल श्री त्रिपाठी ने नियो न्यूज़ से बातचीत में बंदियों के भागने की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि जेल प्रशासन द्वारा अपनी ओर से पूरी ऐहतियात बरती जा रही थी, क्योंकि जिस बैरक से बंदी भागे हैं, उसके पास की ही एक अन्य बैरक में आगरा का एक आत्महत्या की प्रवृत्ति वाला बंदी भी निरुद्ध है, जिसकी सघन निगरानी के निर्देश दिए गए थे। यदि निर्देशों का सही ढंग से पालन किया गया होता तो यह घटना कदापि न होती। इसलिए फिलहाल उक्त चारों जेल सुरक्षा कर्मियों को प्रथमदृष्टया लापरवाही का दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया गया है। जांच अभी जारी है।

एक अन्य जांच थाना सदर बाजार पुलिस द्वारा घटना के संबंध में दर्ज मुकदमे की शुरू हो चुकी है। पुलिस और विभागीय जांच के अलावा इस घटना की अभी दो जांचें और होंगी, जिनमें से एक न्यायिक और दूसरी मजिस्ट्रियल जांच होगी। न्यायिक जांच जनपद न्यायाधीश के आदेश से और मजिस्ट्रियल जांच जिलाधिकारी के आदेश से होगी।

मथुरा जिला कारागार से बंदियों के भागने की यह कोई पहली घटना नहीं है। सन् 2010 में भी इसी प्रकार यहां से 4 बंदी भाग चुके हैं। इसके अलावा 2014 में यहां राजेश टोटा जैसे बदमाशों की गैंगवार हो चुकी है और उससे पहले जेल के अंदर बंदियों को कैप्सूल में जहर देकर भी मारा जा चुका है।

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