सर्वोच्च न्यायालय की स्थिति पर चर्चा के लिए पूर्ण अदालत बुलाई जाए : पूर्व प्रधान न्यायाधीश

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तिरुवनंतपुरम, 12 जनवरी 2018 (ब्यूरो ।
सुप्रीम कोर्ट के चार न्यायाधीशों द्वारा गत दिवस मीडिया से रूबरू होकर व्यवस्था पर सवाल उठाए जाने के संबंध में देश के कुछ पूर्व न्यायाधीशों ने अपनी प्रतिक्रिया जताई है।

एक पूर्व प्रधान न्यायाधीश और दो अन्य पूर्व न्यायाधीशों ने सर्वोच्च न्यायालय के चार वरिष्ठ कार्यरत न्यायाधीशों द्वारा शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय प्रशासन के खिलाफ उठाई गई शिकायत को अभूतपूर्व बताया और कहा कि जल्द ही पूर्ण अदालत की एक बैठक बुलाई जानी चाहिए।

पूर्व प्रधान न्यायाधीश के.जी. बालाकृष्णन ने मीडिया से कहा कि चार न्यायाधीशों ने जो किया, वे न तो उसके पक्ष में हैं और न खिलाफ में हैं।उन्होंने कहा, जो भी कुछ घटित हो रहा है, बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे बचा जाना चाहिए।

बालाकृष्णन ने कहा, न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर सवाल नहीं होना चाहिए और ये घटनाएं आम आदमी को यह एहसास करा सकती हैं कि चीजें सही तरीके से नहीं चल रही हैं। पूर्ण अदालत की बैठक तुरंत बुलाई जानी चाहिए।

शीर्ष अदालत से बतौर न्यायाधीश सेवानिवृत्त हुए न्यायमूर्ति के.टी. थॉमस ने कहा, अब गेंद प्रधान न्यायाधीश (दीपक मिश्रा) के पाले में है, जो इस मुद्दे को हल करने में सबसे सक्षम व्यक्ति हैं।

थॉमस ने कहा, ऐसा कभी नहीं हुआ है कि न्यायाधीशों ने संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया हो। मैंने पत्र में पढ़ा है कि चार न्यायाधीशों ने प्रक्रियागत खामियों की बात की और अब सीजेआई को अपनी बात रखनी है। पूर्ण अदालत बुलाई जानी चाहिए।

शीर्ष अदालत के एक अन्य सेवानिवृत्त न्यायाधीश के.एस. राधाकृष्णन ने कहा कि न्यायाधीशों का सात पृष्ठों का पत्र सामान्य है।

राधाकृष्णन ने कहा, पत्र में साफ तौर बताया जाना चाहिए था कि कौन सा मामला है और यह विवरण है। सामान्य नियम है कि यदि किसी न्यायाधीश का किसी मामले में किसी भी तरह का हित जुड़ा है तो उसे उस न्यायाधीश द्वारा नहीं सुना जाना चाहिए।

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