निकाय चुनाव मे जिला बसपा औऱ प्रत्याशी सौदेबाज़ी मे व्यस्त ….

नोटबन्दी के बाद हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के नतीज़ों से यह समझा जा रहा था कि बसपा का परम्परागत वोट बैंक नोटबन्दी से प्रभावित होकर भाजपा को शिफ्ट हो गया ऐसा समझा जाता है इसके बाबजूद भी बसपा ने अपना रवैया नही बदला

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निकाय चुनाव मे जिला बसपा औऱ प्रत्याशी सौदेबाज़ी मे व्यस्त ….
नवगठित मथुरा नगर निगम के प्रथम चुनाव ऐतिहासिक माने जा रहे हैं आगामी दिनों में लोकसभा चुनाव आने वाले हैं जिसे देखते हुए सभी राजनीतिक दल इन चुनावों को लोकसभा चुनावों का रिहर्सल मानकर चल रहे हैं वही बसपा के साथ ऐसा नहीं कहा जा सकता है विधानसभा और लोकसभा चुनावों में मिली लगातार हाथों से पार्टी का मनोबल पूरी तरह टूटा हुआ नजर आ रहा है उम्मीद थी कि इस बार पार्टी एकजुट होकर इन चुनावों में अच्छे प्रदर्शन के जरिए विरोधियों को जवाब देने का प्रयास करेगी और प्रदेश की सत्ता में वापसी की राह पकड़ेगी. लेकिन ऐसा होता इसलिए अगर नहीं आ रहा है क्योंकि बहुजन समाज पार्टी शुरु से ही निकाय चुनावों को लेकर गंभीर नजर नहीं आई और इसकी शुरुआत उसने मथुरा नगर निकाय के 70 वार्डों में महज 42 प्रत्याशी ही खडे करके कर दी. यही नहीं पार्टी ने अपने मेयर पद के प्रत्याशी को बदल कर भी अपनी कमजोरी का एहसास करा दिया.

नोटबन्दी के बाद हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के नतीज़ों से यह समझा जा रहा था कि बसपा का परम्परागत वोट बैंक नोटबन्दी से प्रभावित होकर भाजपा को शिफ्ट हो गया ऐसा समझा जाता है इसके बाबजूद भी बसपा ने अपना रवैया नही बदला. मौजूदा समय में जहां सभी प्रत्याशी प्रचार में मशगूल नजर आ रहे है वहीं बसपा के मेयर पद के प्रत्याशी अपनी टिकट की भरपूर कीमत वसूलने की जुगत लड़ाते हुए नजर आ रहे हैं सियासी सूत्रों की माने तो पूर्व प्रत्याशी की टिकट कटवाने के बाद बसपा के मेयर पद के वर्तमान प्रत्याशी को टिकट हासिल करने के लिए मोटी रकम चुकानी पड़ी थी जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ा है बसपा प्रत्याशी को आगे की राह मुश्किल नजर आने लगी है इसीलिए चलते-चलते वह टिकट के लिए खर्च की गई रकम को वसूलने की पुरजोर कोशिश करते नजर आ रहे हैं पार्टी के ही सूत्रों की माने तो बसपा मेयर प्रत्याशी विपक्षी प्रत्याशियों के साथ मोलतोल कर रहे हैं. राजनीतिक हलकों में ये चर्चाएं बहुत जोर से चल रही है कि बसपा के मेयर प्रत्याशी कभी भी मैदान छोड़ सकते हैं. खुद को फंसता पा बसपा प्रत्याशी टिकट की कीमत वसूलने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते हैं और इसके लिए उन्होंने शहर के प्रमुख उद्योगपतियों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है सूत्रों का कहना है कि बसपा के मेयर प्रत्याशी अपनी जीत का दावा करते हुए प्रमुख उद्योगपतियों को चुनाव जीतने के बाद लाभ दिलाने का वादा कर रहे हैं और उनसे मोटा चंदा वसूल करने में लगे हुए हैं. सूत्रों की मानें तो बसपा पार्टी का जिला संगठन भी इसी तरह की गतिविधियों में लिप्त है और वह भी अपने प्रत्याशियों की सौदेबाजी करने में लगा हुआ है इन सब बातों से परेशान बसपा के तमाम पार्षद पद के प्रत्याशी जो मोटी रकम जमा कर टिकट हासिल कर पाए थे अब अपने को फसा हुआ महसूस कर रहे हैं और उन्होंने भी विरोधियों से सौदेबाजी तेज कर दी है.
कमोवेश यही हाल समाजवादी पार्टी का भी है समाजवादी पार्टी भी इस बार के चुनावी संग्राम में कहीं नजर नहीं आ रही है जहां उसके मेयर पद के प्रत्याशी चुनावी संग्राम में पिछड़ते नजर आ रहे हैं तो वहीं सपा के तमाम प्रत्याशी विपक्षियों के आगे घुटने टेकने में लगे हुए हैं वार्ड नंबर 46 से सपा के प्रत्याशी ने जहा निर्दलीय को समर्थन दे दिया तो वहीं वार्ड नंबर 41 में सपा प्रत्याशी का पर्चा वापस करना भी अपने आप में बहुत कुछ कहता है. एक बात तय है निकाय चुनावों को इन पार्टियों ने इसी तरह से लड़ा तो उनकी बची खुची राजनीतिक जमीन फिसलना भी महज वक्त की बात होगी.

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