whatsapp पर मैसेज करें तो जरा सम्हल कर! कहीं लेने के देने न पड़ जायें

फ़ेसबुक से अधिक अगर कहीं इसका ज़्यादा असर देख जाता है, तो वो है WhatsApp, इसे इस्तेमाल करने वाले लोगों पर क्राइम सेल और पुलिस आसानी से निगाहें रख सकते हैं. लेकिन ऐसे भी केस हुए हैं, जिनमें लोगों को हार्मलेस मेसेज के लिए हवालात पहुंचाया गया

0
600

आज से 5 साल पहले बाल ठाकरे की मौत के वक़्त दो लड़कियों को गिरफ़्तार किया गया था. इनमें से एक लड़की ने फ़ेसबुक पर ठाकरे की मौत की वजह से मुंबई में लगे जाम पर सवाल उठाया था, एक ने उस स्टेटस को लाइक किया था. इनकी गिरफ़्तारी की वजह बस यही थी. उस समय इस एक्शन की हर तरफ़ निंदा और आलोचना हुई थी. उस समय ये इक्का-दुक्का Cases में से एक था, लेकिन 5 साल बाद Whatsapp पर भेजे गए Forwards या फ़ेसबुक के स्टेटस आपको जेल भिजवा सकते हैं.

जैसे 18 साल के ज़ाकिर त्यागी के साथ हुआ,जब उसने फ़ेसबुक पर लोगों से पूछा कि गंगा को ‘लिविंग एंटिटी’ यानि ‘किसी जीती जागती चीज़ की तरह क्यों माना जाता है’? इस स्टेटस के बाद ही ज़ाकिर को पुलिस उठा ले गयी, उसे 42 दिनों तक प्रताड़ित किया गया और जब तक वो वापस आया, उसकी नौकरी जा चुकी थी.

दुनिया के बाकी देशों की तरह भारत में भी फ़्री स्पीच कंडीशंस के साथ आती है. राजनितिक, धार्मिक और समाज के संवेदनशील मुद्दों पर पैनी नज़र रखी जाती है और इनकी अवहेलना IT Act का हनन मानी जाती है. ये बात अलग है कि इस समय माहौल अलग बन गया है.

फ़ेसबुक से अधिक अगर कहीं इसका ज़्यादा असर देख जाता है, तो वो है WhatsApp, इसे इस्तेमाल करने वाले लोगों पर क्राइम सेल और पुलिस आसानी से निगाहें रख सकते हैं. लेकिन ऐसे भी केस हुए हैं, जिनमें लोगों को हार्मलेस मेसेज के लिए हवालात पहुंचाया गया. कई बार लोगों को किसी WhatsApp फॉवर्ड के चक्कर में जेल की सज़ा खानी पड़ी, क्योंकि उनके इनबॉक्स में ये मेसेज थे. हालांकि पुलिस और सरकार, चुनाव के दौरान चलने वाले राजनितिक कार्टून्स पर कोई ख़ास एक्शन नहीं लेते. ये कार्टून्स या वीडियो ज़्यादातर राजनितिक दलों के संज्ञान में ही बनते हैं

बोलने की आज़ादी का हनन मापने का फ़िलहाल कोई पैमाना नहीं है. किसी भी बात पर, किसी को भी कटघरे में खड़ा किया जा सकता है और ये दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए शर्मनाक बात है. ‘पद्मावती’ के ख़िलाफ़ प्रोटेस्ट कर रहे लोग जब ये कहते हैं कि दीपिका का सिर काट दिया जाए, तब वो भी वही अपराध कर रहे होते हैं, लेकिन बयार चूंकि उनके फ़ेवर में बह रही है, इसलिए उनसे कोई माफ़ी की उम्मीद नहीं करेगा.

सोशल मीडिया की वजह से होने वाले अरेस्ट की संख्या बढ़ी है और बढ़ती जाएगी, इसमें कोई दोराय नहीं.

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here