80 प्रतिशत प्रत्याशियों ने “निकाय चुनाव” जमीन की बजाए सोशल मीडिया पर ही लड़ा

सौजन्य से -रीना गुप्ता (सोशलाइट-निओ न्यूज़) की कलम से

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मथुरा-निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित नामांकन की तारीख के पहले से ही निकाय चुनाव के अधिकांश प्रत्याशी सोशल मीडिया पर अपनी ब्रांडिंग विभिन्न राजनैतिक पार्टियों की टिकट प्राप्त करने के लिए कर रहे थे तब यह समझा जा रहा था कि सभी राजनैतिक दलों मे एक से अधिक दावेदार होने की दृष्टि में ये अपनी टिकट के दावेदारी को पुरज़ोर प्रस्तुत करने के लिए सोशल मीडिया का प्रयोग कर रहे है।

टिकटों का वितरण और नामांकन प्रक्रिया समाप्त हो जाने के बाद भी सोशल मीडिया पर प्रत्याशियो के पोस्ट्स से सजी रही तो तब भी यह समझा जा रहा था कि चुनाव प्रचार प्रारम्भ होने के पश्चात यह प्रत्याशी जमीन पर जनता के बीच जाएंगे और जनता को अपनी नीतियों से अवगत करा कर भरोसा और समर्थन हासिल करेंगे। परन्तु यह देखा गया कि चुनाव निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव प्रचार के लिए दिए गए 13 दिन तक अधिकांश प्रत्याशी सोशल मीडिया को ही अपना प्रचार माध्यम बना कर यह समझते रहे कि उनका प्रचार और नीतियां उनके प्रत्येक मतदाता तक प्रभाबी रूप से पहुच रही है और वह विजय श्री हासिल कर चुके है।

मनमोहन तरीके से पोस्ट की गई स्वयं की फोटो पर कमैंट्स और लाइक्स गिनते समय यह भी भूल गए कि उनको मिलने वाले कमैंट्स और लाइक्स मे उनके मतदाता कितने है। मुझे हँसी तब आयी जब एक प्रत्याशी ने मुझे बताया “मेम” मुझे लंदन और दुबई से भी लाइक्स और कमैंट्स आ रहे है “मै ठीक चल रहा हूँ ना” मैंने कहा “जी भाई” “आप परफेक्ट ट्रैक पर है” उसने मेरी अगली लाइन सुनी ही नही “कि आप निश्चित ही हारने वाले ट्रैक पर हो” उस से पहले ही उसने 3 बार “थैंक्यू मेम”बोल कर फ़ोन काट दिया। मैं हँसती ही रह गयी।जनता के बीच ना जाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट्स के सहारे चुनाव लड़ने वाले यह प्रत्याशी किसी तरह जीत भी गए तो जनता की समस्याओं को कैसे हल करेंगे यह आप खुद सोच ले। सोशल मीडिया पर 70 प्रतिशत पोस्ट्स फ़र्ज़ी या स्वयं संपादित होते है यह बात प्रत्येक पोस्ट करने वाला और पढ़ने वाला दोनो ही भली भांति जानते है इस लिए सोशल मीडिया के पोस्ट्स को जिम्मेदाराना नही माना जाता फिर भी पूरे चुनाव प्रचार के दौरान सोशल मीडिया का भरपूर प्रयोग किया गया। अब देखना यह है कि 26 नवम्बर को इन सोशल मीडिया “किंग्स” को जनता किस प्रकार मत देती है।

सौजन्य से -रीना गुप्ता (सोशलाइट-निओ न्यूज़) की कलम से

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