अलग अलग भाषाओं में लेना चाहते है शपथ,नवनिर्वाचित पार्षदों ने की जातिवाद की राजनीति

शासन द्वारा क्या आदेश आएगा कि शपथ किस भाषा में करायी जाये अलीगढ़ की राजनीति में एक नया मोड़ यहाँ देखने को मिल रहा है कि जीतकर आये पार्षदों ने राजनीती  विकास को न लेकर जाति और धर्म को लेकर शुरू कर दी

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अलीगढ-आपको बता दे कि उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव समाप्त होने के बाद राजनीती का घमासान शुरू हो चुका है है,आपने कई नेताओं को राजनीती के नए अंदाज में देखा होगा परन्तु अलीगढ़ स्मार्ट सिटी में सुमार होने के वाद यहाँ पर जीत कर आये पार्षदों की राजनीती कुछ अलग ही दर्शा रही है|

राजनीती भी स्मार्ट सिटी या जनता के लिए नही बल्कि धर्म और जाति को लेकर शुरू हो चुकी है,अलीगढ के वार्ड 54 से जीतकर आये बसपा पार्षद मुशर्रफ़ हुसैन महजर ने तो यहाँ तक कह दिया मुझे शपथ उर्दू में दिलाई जाये ये मेरा अधिकारिक हक़ है शपथ तो कोई किसी भी भाषा में ले सकता है, जब कि हमारे देश के रुपयों पर उर्दू भाषा का शब्द अंकित हो सकता है तो मुझे उर्दू में भी शपथ क्यो नही दिलाई जा सकती और मैंने पिछली बार भी शपथ उर्दू में ही ली थी,इस बार भी उर्दू में ही शपथ लूंगा और बन्दे मातरम नही बोलूंगा ये मेरे मजहब में नही है इस्लाम हमें ये नही सिखाता

वही भाजपा से 26 नंवर वार्ड से जीत कर आये हेमंत गुप्ता ने भी कहा कि मुझे भी शपथ संस्कृत में दिलाई जाये जब कोई पार्षद उर्दू में ले सकता है तो मुझे भी संस्कृत में शपथ दिलाई जाये अलीगढ़ की राजनीती में नया दिलचस्प मोड़ आया अब देखना होगा की शासन द्वारा क्या आदेश आएगा कि शपथ किस भाषा में करायी जाये अलीगढ़ की राजनीति में एक नया मोड़ यहाँ देखने को मिल रहा है कि जीतकर आये पार्षदों ने राजनीती  विकास को न लेकर जाति और धर्म को लेकर शुरू कर दी

पूरे मामले पर नव निर्वाचित मेयर मोहम्मद फुरकान का कहना है कि अभी शपथ लेनी है।  कोई भी अपनी राय दे सकता है किसी को क्या है। हिंदी में ले,उर्दू में ले ,अंग्रेजी में लें। राष्ट्रिय गीत सब जगह गाया जाता है। बाकि जब वक्त आएगा तब बताएँगे अभी पहले से क्या कहे बच्चा होगा बेटा होगा बेटी होगी

नगर आयुक्त का कहना है कि पार्षदों का पत्र मिला है। शपथ की ब्यवस्था कराएँगे।

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