इन दिनों मोसुल बांध की जलाशय में बहुत गिरावट आ रही है। इसके कारण लोगों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच आई हैं। बारिश के आसार दिखाई नहीं दे रहे हैं। तीन-साढ़े तीन साल पुरानी एक मीता साम्राज्य की इमारत, जो कि एक बरसाती नदी के अन्दर है, वह इन दिनों दिखाई देने लगी है। परिणामस्वरूप, लोग भी आश्चर्यचकित हैं।
राज्य में एक बार सीरिया और मेसोपोटामिया का वर्चस्व रहा है। बांध इराक में टिगरिस नदी पर बनाया गया है। मोसुल बांध इराक का सबसे बड़ा बांध है। इस बांध को सद्दाम बांध भी कहा जाता है।
इस बार नदी सुखीभाटा बन गई है और अब महल भी दिखाई दे रहा है। जर्मन और कुर्द पुरातत्व विशेषज्ञों की एक टीम ने जांच की कि पानी का स्तर कहां गिरा है। जहां उन्हें 3,400 साल पुराना महल मिला।
जर्मनी के ट्यूबिंगन विश्वविद्यालय ने दावा किया है कि उसका रहस्यमय मीता साम्राज्य से कहीं ना कहीं संबंध है। अभी तक इस साम्राज्य की राजधानी का एहसास नहीं हुआ है।
पुरातत्वविदों का मानना है कि नदी के जलभृत की गिरावट से अब मीता के राज्य की प्रणाली को समझने में मदद मिलेगी। सन 1975 में राजघाट बांध का शिलान्यास हुआ था। इसके बाद 1979-80 में बांध का काम पूरा हुआ तो बेतवा के डूब क्षेत्र में महल आ गया। इसका मुआवजा एक करोड़ 68 लाख रुपए आंका गया था। तत्कालीन सांसद माधवराव सिंधिया ने स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया में राशि जमा कराई थी।