प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी और अद्र्ध सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में मिड-डे मील बनाने वाले रसोइयों को बड़ी राहत दी है। प्रदेश के ऐसे सभी रसोइयों को न्यूनतम वेतन का भुगतान करने का सामान्य आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिया है।
कोर्ट ने कहा है कि मिड-डे-मील रसोइयों को एक हजार रूपये वेतन देना बंधुआ मजदूरी है। जिसे संविधान के अनुच्छेद 23 में प्रतिबंधित किया गया है। कोर्ट ने कहा है कि प्रत्येक नागरिक का मूल अधिकार के हनन पर कोर्ट मे आने का अधिकार है। वहीं सरकार का भी संवैधानिक दायित्व है कि किसी के मूल अधिकार का हनन न होने पाये। सरकार न्यूनतम वेतन से कम वेतन नहीं दे सकती।
कोर्ट ने केंद्र एवं राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि मिड-डे-मील बनाने वाले प्रदेश के सभी रसोइयों को न्यूनतम वेतन अधिनियम के तहत निर्धारित न्यूनतम वेतन का भुगतान सुनिश्चित करे। कोर्ट ने सभी जिलाधिकारियों को इस आदेश पर अमल करते हुए सभी रसोइयों को न्यूनतम वेतन का भुगतान करने का निर्देश दिया है और केंद्र व राज्य सरकार को चार माह के भीतर न्यूनतम वेतन तय कर 2005 से अब तक सभी रसोइयों को वेतन अंतर के बकाये का निर्धारण करने का आदेश दिया है।