2021 के पहले ही दिन देश में 60 हजार बच्चों ने जन्म लिया। स्टेटिस्टा के आंकड़ों के मुताबिक भारत में जनवरी-फरवरी में सबसे ज्यादा डिलीवरी होती हैं। हर साल देश में जितने बच्चों का जन्म होता है, उनमें से 22% बच्चे जनवरी से मार्च के बीच जन्म लेते हैं। पिछले 5 साल से यही ट्रेंड बना हुआ है। ठंड के मौसम में मां और बच्चे को स्वस्थ रहने की चुनौती भी होती है। इसलिए आइए जानते हैं कि डिलीवरी के बाद मां का डाइट और रिकवरी चार्ट कैसा होना चाहिए।
लखनऊ में गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर रीता गुप्ता कहती हैं कि मां के लिए डिलीवरी के बाद के एक महीने काफी नाजुक होते हैं। इस वक्त उनका शारीरिक और मानसिक तौर पर फिट रहना काफी जरूरी होता है। जब मां स्वस्थ रहेगी, तभी बच्चा भी हेल्दी रहेगा। मां को डिलीवरी के बाद अगले 24 घंटे तक बेड नहीं छोड़ना चाहिए। 7 दिन तक शरीर पर बिल्कुल जोर नहीं देना चाहिए।
डिलीवरी के बाद अगले 30 दिन क्यों अहम होते हैं?
डॉक्टर रीता कहती हैं कि डिलीवरी के दौरान मां को काफी ब्लीडिंग होती है। इसके अलावा 9 महीने तक बच्चे को गर्भ में पालकर मां जब उसे जन्म देती है तो शारीरिक तौर पर काफी कमजोर हो जाती है। इस वक्त मां को अपने खानपान पर काफी ध्यान देने की जरूरत होती है। उसे ऐसा फूड खाना चाहिए, जिसमें न्यूट्रिएंट्स भरपूर हो। मां के शरीर में (ह्वाइट ब्लड सेल्स) की मात्रा बढ़े, इसके लिए उसे ड्राई फ्रूट खाना चाहिए। हालांकि ज्यादा हैवी फूड खाने से बचना चाहिए, लेकिन हल्का और विटामिन युक्त खाना जरूर खाएं। आयरन, विटामिन- ए, बी, सी, डी और के के साथ कैल्शियम युक्त खाना भी जरूरी है।