Saturday, April 5, 2025
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मथुरा में सभी 6 कोविड हॉस्पीटल हाउसफुल, बेड के लिए लंबी वेटिंग लिस्ट

  • देश के कोने-कोने से उपचार के लिए मथुरा आ रहे कोरोना मरीज
  • दो कोविड हॉस्पीटल में सर्वाधिक अन्य शहरों के कोरोना मरीज ले रहे स्वास्थ्य सेवा

मथुरा। जिले के छह कोविड हॉस्पीटल में मात्र 1250 बैड। लेकिन प्रतिदिन कोरोना के रिकॉर्ड केस सामने आ रहे हैं। अस्पतालों में बैड फुल होने के कारण कोरोना के मरीजों लंबी वेटिंग चल रही है। बेड और ऑक्सीजन के लिए मारामारी हो रही है। वहीं स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारी चुप्पी साधे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कोविड अस्पतालों में भर्ती होने के लिए दो दर्जन से अधिक लोगों की वेटिंग चल रही है। अधिकारियों को कोरोना मरीज के तीमारदार लगातार फोन पर संपर्क करने का प्रयास कर रहे हैं। सोशल मीडिया का भी सहारा ले रहे हैं। लेकिन लोगोें को बेड और डॉक्टरो का परामर्श तक नहीं मिल पा रहा है।

जिला संयुक्त चिकित्सालय के डॉ. पीयूष चौबे ने बताया कि जिला संयुक्त चिकित्सालय में एक भी बैड खाली नही है। बैड के लिए लोगों के फोन आ रहे हैं। बैड की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा जिला संयुक्त चिकित्सालय और रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम अस्पताल में तैनात किए रामदत्तराम को जब बेड के फोन कॉल की तो उनका मोबाइल नंबर नॉट रीचेबल हो गया।


नयति अस्पताल के पीआरओ प्रशांत अज्ञानी ने बताया कि अस्पताल में 220 बेड हैं। इनमें 40 वेटिंलेटर हैं। लेकिन कोरोना महामारी के शुरुआत से ही फुल हैं। एक बेड भी खाली नही है। यहां स्थानीय लोगोें के अलावा चंडीगढ, झांसी, दिल्ली, नोएडा सहित अन्य शहरों को भी कोरोना मरीज आकर उपचार करा रहे हैं।

डिप्टी सीएमओ डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में मथुरा जिले मेें 6 अस्पताल हैं। इन अस्पतालों में जिला संयुक्त चिकित्सालय, जिला चिकित्सालय, रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम, केडी मेडीकल कॉलेज, नयति मेडिसिटी हॉस्पीटल केएम मेडीकल कॉलेज शमिल हैं। इन सभी अस्पतालों में 1250 बेड हैं। लेकिन वर्तमान समय में सभी अस्पतालों मेंं बैड फुल हैं। अधिकांश कोविड मरीजों को होम आइसोलेट किया जा रहा है। हालत ज्यादा खराब होने पर ही अस्पताल में एडमिट किया जा रहा है।

डिप्टी सीएमओ ने बताया कि इन कोविड हॉस्पीटलों में अन्य शहरों से भी आकर कोविड के मरीज अपना इलाज करा रहे हैं। कोशिश की जा रही है कि अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके। उन्होंने बताया कि स्वर्ण जयंती हॉस्पीटल में 100 और ऑक्सीजन बैड तैयार किए जा रहे हैं। संभवत: एक सप्ताह में बैड तैयार होने की संभावना है।

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