Saturday, April 5, 2025
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संदिग्ध खोजने में मदद करेगी जीएलए के प्रोफेसरों की तकनीक, पेटेंट पब्लिश

मथुरा। जीएलए विश्वविद्यालय मथुरा के कम्प्यूटर इंजीनियरिंग एंड एप्लीकेशन विभाग के प्रोफेसरों ने ‘‘स्वचालित प्रशिक्षित मॉडल‘‘ वर्चुअल सिमुलेटर का उपयोग करके भीड़ में संदिग्ध मानव का पता लगाने और ट्रैक करने के लिए एक विधि एवं प्रणाली को तैयार किया गया है। इस आधुनिक प्रणाली का पेटेंट भी पब्लिश हो चुका है।


मानव प्रवृति एवं भीड़भाड़ वाले स्थान पर नजर रखने के लिए न केवल अपराधी प्रवृति के लोगों को पकड़ना अब आसान हो गया है, बल्कि उनकी कुछ ऐसी एक्टिविटीज को पकड़कर रिपोर्टिंग करने वाले को बताना कि वह व्यक्ति संदिग्ध कार्यों में लिप्त है, जिससे संदिग्ध व्यक्ति द्वारा कुछ गलत करने से पहले पकड़ा जा सके एवं किसी संभावित दुर्घटना को रोका जा सके।

जीएलए कम्प्यूटर इंजीनियरिंग एण्ड एप्लीकेशन विभाग की प्रो. चारूल भटनागर एवं जीएलए न्यूजेन आइईडीसी के चीफ कॉर्डिनेटर प्रो. मनोज कुमार ने भीड़भाड़ वाले इलाकों के लिए ऐसा शोध किया गया है, जिसके माध्यम से संदिग्ध मानव का आसानी से पता लगाया जा सकता है कि उसकी गतिविधियों पर नजर रखकर उसको अपराध किए जाने से पूर्व भी पकड़ा जा सके।

चीफ कोऑर्डिनेटर ने बताया कि एक वर्चुअल सिमुलेटर यानि एक सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है, जिसमें भीड़भाड़ वाले इलाकों की वीडियो को अपलोड़ करना होगा। इसके बाद सर्चिंग प्रक्रिया को जारी रखना होगा। अगर कोई भी संदिग्ध व्यक्ति होगा तो यह सॉफ्टवेयर आधुनिक तकनीक विधि से उस संदिग्ध व्यक्ति को तत्काल कैच कर पेश कर देगा यानि फोटो कैप्चर कर सामने लाने का कार्य करेगा। शोध का मुख्य लक्ष्य अपराधी प्रवृति के लोगों को पकड़ना एवं संभावित दुर्घटना को रोकना है, जिससे एक अच्छे और संस्कारी समाज की स्थापना की जा सके।

डीन रिसर्च प्रो. अनिरूद्ध प्रधान, विभागाध्यक्ष प्रो. आनंद सिंह जलाल एवं एसोसिएट डीन रिसर्च प्रो. कमल शर्मा ने बताया कि कम्प्यूटर इंजीनियरिंग के छात्रों और प्रोफेसरों द्वारा दिन-प्रतिदिन नई तकनीकों की खोज कर उनको जनता के फायदे के लिए सामने लाने का कार्य किया जा रहा है। ऐसे रिसर्च देशहित में है।

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