वृंदावन। देशभर में आज जन्माष्टमी की धूम मची है। हर मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। लेकिन आज मथुरा समेत ब्रज के मंदिरों में जन्माष्टमी का उल्लास छाया है। मथुरा में कान्हा से जुड़ी कई कहानियां और किस्से ऐसे हंै जो कि बहुत ही रहस्यमय है। इनमें से एक कहानी मथुरा के निधिवन की भी है। यहां ठा. बाँकेबिहारी संगीत साधना से स्वामी हरिदास महाराज द्वारा प्रकट किए थे। इस निधवन के बारे में यह भी कहा जाता है कि हजारों सालों के बाद आज भी यहां भगवान श्री कृष्ण राधारानी और गोपियों के साथ रासलीला करते हैं।

वृंदावन शहर के मध्य इस प्राचीन धार्मिक स्थल निधिवन को भक्तजन मधुवन के नाम से भी जानते हैं। यह मथुरा से लगभग 15 किलोमीटर दूर यमुना के तट पर स्थित है। माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने शरद पूर्णिमा को रात में में यहां गोपियों के साथ रासलीला रचाई थी, और तब से शरद पूर्णिमा की रात को यहां भगवान गोपियों के साथ आते हैं।
यहां मौजूद वन तुलसी के पौधे गोपियों का रूप ले लेते हैं। निधिवन के सेवायत भीकचन्द्र गोस्वामी ने बताय कि निधिवन के पेड़ों की भी विशेषता है। दुनियाभर में पेड़े जमीन से ऊपर की ओर होते हैं। लेकिन यहां के पेड़ भी ऊपर की ओर न होकर नीचे की ओर झुके रहते हैं। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण के साथ रासलीला करते हैं।
यह रासलीला सुबह होने तक चलती है। इसके बाद तुलसी के पौधे अपना रूप ले लेते हैं। बता दें कि शरद पूर्णिमा की रात इस वन में किसी का भी प्रवेश नहीं होता । शाम से ही निधिवन को पूरी तरह खाली करा दिया जाता है।
कहा जाता है कि यदि कोई छिपकर रासलीला देखने की कोशिश करता है तो वह पागल हो जाता है। मंदिर के गोस्वामी और आसपास के लोग इससे जुड़े कई किस्से सुनाते हैं। दावा किया जाता है कि यहां मौजूद पशु-पक्षी भी शाम को वन छोड़कर चले जाते हैं।