बच्चे पढ़ें और संस्कारों को भी करें आत्मसातः डॉ. रामकिशोर अग्रवाल
मथुरा। शनिवार को राजीव इंटरनेशनल स्कूल में किंडर गार्टन के बच्चों ने ग्रैंड पैरेंट्स डे मनाया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को उनके ग्रैंड पैरेंट्स से जोड़ना था। कार्यक्रम में बच्चों को अपने दादा-दादी एवं नाना-नानी के प्रति आदर का भाव रखने एवं उनकी देखभाल करने के लिए प्रेरित किया गया। यह कार्यक्रम विद्यालय की संस्कारशाला की एक कड़ी है। कार्यक्रम का शुभारम्भ छात्रा गौरी के दादा-दादी हरवीर सिंह और गीता सिंह ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलित कर किया।

कार्यक्रम में नन्हें-मुन्ने बच्चों ने काव्यपाठ के साथ ही नयनाभिराम नृत्य व अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करते हुए अपने दादा-दादी एवं नानी-नानी को उपहार प्रदान किए। कार्यक्रम का संचालन एंजल खण्डेलवाल, कर्शित अग्रवाल, सुमेध, गार्गी सिंह, आस्था जैन तथा मान्या भारद्वाज द्वारा किया गया। ग्रैंड पैरेंट्स ने राजीव इंटरनेशनल स्कूल के प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना की।

आर.के. एजूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा कि शिक्षा के साथ ही बच्चों को संस्कार देना ही राजीव इंटरनेशनल स्कूल की प्राथमिकता है। डॉ. अग्रवाल ने बच्चों का आह्वान किया कि वे अपने परिवार में दादा-दादी, नाना-नानी एवं हर अपने से बड़े का आदर करें इससे उन्हें जो प्यार और अपनापन मिलेगा वह अतुलनीय होगा। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि जब तक हम संस्कारों को आत्मसात नहीं करेंगे तब तक शिक्षा के कोई मायने नहीं हैं। दरअसल, दादा-दादी, नाना-नानी अनुभव की किताब होते हैं, जिनकी हर सीख महत्वपूर्ण होती है।

स्कूल के प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल ने नन्हें-मुन्ने बच्चों की शानदार प्रस्तुतियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि आजकल एकल परिवार का चलन बढ़ रहा है। शिक्षा और दीगर व्यस्तताओं के कारण बच्चों की अपने ग्रैंड पैरेंट्स से दूरियां बढ़ती जा रही हैं, जोकि समाज के लिए अच्छी बात नहीं है। श्री अग्रवाल ने कहा कि थोड़े से प्रयास और सामंजस्य द्वारा इस कठिनाई को दूर किया जा सकता है। यह हर माता-पिता का दायित्व है कि वे बच्चों को दादा-दादी, नाना-नानी के साथ कुछ समय बिताने का अवसर जरूर दें, इससे उनमें जहां अपनत्व का भाव पैदा होगा वहीं वे परिवार के मायने भी समझ पाएंगे।

स्कूल की शैक्षिक संयोजिका प्रिया मदान ने सभी उपस्थित ग्रैंड पैरेंट्स का स्वागत करते हुए बच्चों का आह्वान किया कि वे अपने से बड़ों का आदर करें, उनके मान-सम्मान और उनकी जरूरतों का ध्यान जरूर रखें। हर बच्चे का परम कर्तव्य है कि वह अपने ग्रैंड पैरेंट्स को सम्मान दे क्योंकि परिवार सबसे बड़ी पाठशाला है, जहां पुस्तकें नहीं बल्कि स्नेह और प्यार का पाठ पढ़ाया जाता है।