विजय कुमार गुप्ता
मथुरा। असली जन्म स्थान पर भव्य मंदिर निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। मजेदार बात यह है कि इस बात की भनक तक किसी को नहीं है। भगवान श्री कृष्ण की असली जन्म भूमि जिसे ईदगाह कहा जाता है, पर अयोध्या की तर्ज पर भव्य मंदिर बनने की दिशा में अलौकिक कार्यवाही प्रारंभ हो चुकी है और मंदिर का द्वार कहां होगा यह भी सुनिश्चित हो चुका है। द्वारा के नींचे देहरी के स्थान को रेलवे लाइन हटाकर काफी कुछ समतल किया जा चुका है।
यह अद्भुत कार्य शासन या प्रशासन द्वारा नहीं बल्कि स्वयं भगवान श्री कृष्ण और उनकी प्रियतमा राधा रानी की इच्छानुसार स्वत ही संपादित हो रहा है। कहने सुनने में भले ही यह बात बड़ी अजीबोगरीब लग रही हो किंतु यह एकदम सत्य है।
कुछ घटनाक्रम ऐसे घटित हो जाते हैं जो इंसान की समझ से एकदम परे होते हैं। यानी दिखाई कुछ और देता है किंतु वास्तविकता कुछ और होती है। ठीक यही बात यहां है। अब यथार्थ समझने की दिशा में आगे बढ़ते हैं। श्री कृष्ण जन्म स्थान और असली जन्म स्थान (ईदगाह) के बराबर कुछ समय पूर्व तक रेलवे लाइन थी। उस पर मथुरा वृंदावन के मध्य राधारानी एक्सप्रेस संचालित थी।

अब सांसद हेमा मालिनी की पहल पर रेल का आधुनिकीकरण होना था किंतु रेल की पटरिया हटाते ही स्थानींय लोगों ने असुविधा का हवाला देकर हंगामा कर दिया और आधुनिकीकरण की योजना हो गई टांय-टांय फिस्स। यदि रेलवे द्वारा आधुनिकीकरण करके यहां मेट्रो चलाई जाती तो फिर भव्य मंदिर निर्माण की दिशा में बहुत बड़ी बाधा खड़ी हो जाती क्योंकि यह रेल लाइन जन्म स्थान व असली जन्म स्थान से सटा हुआ यानी एकदम चिपटमा है।
जिस तरह से अदालती कार्यवाही चल रही है उससे स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि अयोध्या की तर्ज पर मथुरा में भी बहुत शीघ्र भव्य कृष्ण मंदिर बनने जा रहा है। इस दिशा में भगवान श्री कृष्ण और उनकी प्रियतमा राधिका जी ने ऐसा चक्र चलाया कि सांप भी मर जाय और लाठी भी न टूटे। यदि शासन और प्रशासन इसी लक्ष्य को लेकर रेल की पटरियों को हटवाते तो बायबेला मच जाता।
रेलवे लाइन हटकर जो कच्चा मार्ग है उसी से सटा हुआ भी कटरा केशव देव है। कटरा केशव देव की प्राचीन दीवाल के खंडहर भी मौजूद हैं। इसी दीवाल को तोड़कर 1892 में रेल मार्ग बनाया गया था। कहने का मतलब है जन्म स्थान, असली जन्म स्थान और कटरा केशव देव इन तीनों को मिलाकर भव्य विशाल मंदिर निर्माण की शुरुआत ईश्वरीय शक्तियों के द्वारा हो चुकी है।
यह शुभ कार्य परम पूज्य देवराहा बाबा के परमप्रिय शिष्य संत शैलजा कांत, भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में लीन रहने वाली सांसद हेमा मालिनी जिनके अंदर कभी-कभी मीरा की झलक भी दिखाई देती है तथा यहां के दुर्लभ जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह की मौजूदगी में ही होगा यह हमारा पक्का विश्वास है। जहां तक हेमा मालिनी की सांसदी का सवाल है वह स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है कि अगली बार भी वे ही सांसद बनेंगी। इसके अलावा यह भी पक्का विश्वास है कि भव्य मंदिर के उद्घाटन में प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ ही शिरकत करेंगे। अब देखने की बात यह है कि पृथ्वी की अदालती औपचारिकताएं कब तक पूरी होती हैं? वैसे ईश्वरीय अदालत का फरमान आ चुका है उसे समझने में भले ही कुछ लोग हिचकें और झिझकें किंतु जजमेंट सीधा साफ और एकदम सरल संकेत में है। सिर्फ समझ समझ का फर्क है। शंकालुओं को जवाब है नाई-नाई बाल कितने जिजमान सामने आ जाएंगे।