विजय गुप्ता की कलम से
मथुरा। कांग्रेस की टिकट पर तीन बार सांसद रह चुके कुं. मानवेंद्र सिंह एक बार फिर सांसदी का चुनाव लड़ने को बेताब हो रहे हैं। फर्क इतना है कि अब वे टिकट कांग्रेस से नहीं भारतीय जनता पार्टी से मांग रहे हैं।
मजेदार बात यह है कि अब वे अस्सी वर्ष के हो चुके हैं और ठीक से चल फिर भी नहीं पाते। ये बैंत के सहारे धीरे-धीरे डगमगाते हुए अपने कदम आगे बढ़ाते हैं। ऐसी स्थिति में उनके सांसद बनने का स्वप्न कहां तक उचित है? इससे भी अधिक हास्यास्पद यह है कि हमेशा से यह जनसंघ और भाजपा को कोसते रहे तथा अब भाजपा की शरण में जाकर उसी से टिकट मांग रहे हैं।
कई वर्ष पूर्व जब कांग्रेस के गर्दिश के दिन आए तब इन्होंने कांग्रेस की ओर पीठ कर ली और अपने पुत्र ऋषिराज के साथ भाजपा में शामिल हो गए। किसी जमाने में ये गांधी परिवार के विश्वास पात्रों में गिने जाते थे किंतु बाद में यह स्थान प्रदीप माथुर ने ले लिया। प्रदीप माथुर शुरू से ही गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी के विश्वासपात्र ही नहीं वफादार भी रहे। प्रदीप माथुर से इनका 36 का आंकड़ा शुरू से ही रहा है।
इस संबंध में जब कुं. मानवेंद्र सिंह से पूछा गया तो उन्होंने स्वीकार किया कि मैं भाजपा से मथुरा की सांसदी का टिकट मांग रहा हूं। आजकल वे भाजपा हाई कमान के सामने अपनी दावेदारी को बड़ी दमदारी के साथ पेश करने में लगे हुए हैं। लोगों का कहना है कि ऐसा करके वै उपहास के पात्र बन रहे हैं। यह सब मुंगेरीलाल के हसीन सपनों जैसा है।