- सत्ता हाथ से जाने के बाद नहीं हो पाया जिला कार्यकारिणी का गठन
- लंबे समय से युवा नेता दे रहे लखनऊ की गणेश परिक्रमा
रवि यादव की रिपोर्ट
मथुरा। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी भले ही 2022 के विधानसभा चुनाव जीतकर सत्ता में आसीन होने का ख्वाब सजो रही है और जनता के बीच जाने का प्रयास कर रही है। लेकिन, 3 साल से पार्टी मथुरा में महानगर अध्यक्ष की तलाश नहीं कर पाई है।
लंबे समय से ही मथुरा जनपद में सपा की धरातलीय स्थिति अच्छी नहीं रही है। एकमात्र सपा नेता के तौर पर बात करें तो डॉ. अशोक अग्रवाल ने सन 2012 के विधानसभा चुनाव में 53000 वोट लाकर एक बार पार्टी का झंडा बुलंद किया। लेकिन, उसके उपरांत आज तक कोई भी नेता समाजवादी पार्टी को सफलता का रस नहीं चखा पाया। मथुरा जनपद में सपा की स्थिति ऐसी है कि नेता सभी, पर कार्यकर्ता कोई नहीं बनना चाहता। यही कारण है कि यहां 1 से 2 साल में जिला अध्यक्ष बदल दिये जाते हैं। लेकिन, जब से सपा के पास से सत्ता गई है तब से जितने भी जिला अध्यक्ष बने वे भी अपने पूरी कार्यकारिणी आज तक नहीं बना पाए। स्थिति जब और हास्यास्पद हो जाती है कि सरकार में मथुरा नगर को महानगर का तमगा मिला था। तब, समाजवादी पार्टी ने डॉ अशोक अग्रवाल को ही महानगर अध्यक्ष का पद सौंपा था। लेकिन विधानसभा चुनावों के दरम्यान डॉ. अशोक अग्रवाल पार्टी को छोड़ गए और राष्ट्रीय लोक दल का दामन थाम लिया। वर्ष 2017 से लेकर के आज तक समाजवादी पार्टी को मथुरा नगर में महानगर अध्यक्ष पद पर कोई भी दावेदार नजर नहीं आया। नतीजतन पिछले ढाई साल में पार्टी का महानगर अध्यक्ष पद खाली है।
सूत्र बताते हैं कि कहीं न कहीं लखनऊ स्तर पर मथुरा नगर या यूं कहें कि मथुरा जनपद का कोई स्थान पार्टी के स्तर पर नहीं है। क्योंकि ज्यादातर पार्टी के वरिष्ठ नेता लखनऊ में कहते हैं। पिछले 3 वर्षों से पार्टी के युवा और जमीन से जुड़े नेता महानगर अध्यक्ष बनने के लिए लखनऊ की गणेश परिक्रमा कर रहे हैं। लेकिन, उनकी कोई ठोस सिफारिश नहीं कर पाता जिससे कि उन्हें महानगर अध्यक्ष का पद मिल पाए। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिरकार 2022 के विधानसभा चुनाव में सत्ता का ख्वाब देखने वाली समाजवादी पार्टी क्या इन हालातों से वापसी लौट पाएगी।