- देश का एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन का भारतीय नौकरियों पर होने वाले प्रभावों से चिंतित है
एजुकेशन डेस्क : गत 23 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 119वें एपिसोड के अंतर्गत स्पेस साइंस, हेल्थ टिप्स, महिला सशक्तिकरण, आईसीसी. चैंपियंस ट्रॉफी के साथ-साथ एक बहुत ही अहम् मुद्दे पर चर्चा की। यह विषय था ‘अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ या एआई।
उन्होंने बताया कि पिछले दिनों पेरिस में आयोजित एक सम्मलेन के दौरान वहां आमंत्रित विभिन्न राष्ट्रों के प्रतिनिधियों ने अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन के क्षेत्र में भारत के युवाओं और प्रोफेशनल्स की दक्षता और उनके योगदान की एक सुर में बहुत प्रशंसा की। वैश्विक मंच से इस प्रकार की सराहना, निश्चित रूप से भारतीय प्रतिभा और योग्यता पर मुहर लगने जैसा ही है।
परन्तु फिर भी देश का एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन का भारतीय नौकरियों पर होने वाले प्रभावों से चिंतित है। आज के दौर में अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन उद्योगों में तेजी से बदलाव आ रहे हैं। भारत, जो दुनिया की सबसे बड़ी श्रमशक्ति में से एक है, इस तकनीकी क्रांति के प्रभावों को महसूस कर रहा है। जहां एक ओर एआई और ऑटोमेशन नए अवसर पैदा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक नौकरियों पर इसका नकारात्मक प्रभाव भी देखा जा रहा है।
भारत में एआई और ऑटोमेशन का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में एआई आधारित टूल्स का उपयोग बढ़ रहा है, जिससे जटिल कार्य जल्दी और कुशलता से पूरे किए जा रहे हैं। ऑटोमेशन के कारण डाटा एंट्री, टेस्टिंग और बेसिक प्रोग्रामिंग जैसी नौकरियों पर असर पड़ा है। ऑटोमेशन ने फैक्ट्रियों में मशीनों के उपयोग को बढ़ा दिया है, जिससे कई श्रमिकों की जरूरत कम हो गई है। इसके साथ ही ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में रोबोटिक्स का बढ़ता इस्तेमाल भी खूब देखने को मिल रहा है। बैंकिंग सेवाओं में भी एआई आधारित चैटबॉट्स और स्वचालित ग्राहक सेवा समाधान अपनाए जा रहे हैं। जिनमें मुख्यतः लोन अप्रूवल, फर्जीवाड़ा पकड़ने और निवेश की गणना करने में एआई का उपयोग बढ़ रहा है, जिससे बैंक कर्मचारियों की पारंपरिक भूमिकाएं प्रभावित हो रही हैं।
मेडिकल सेवाओं में भी एआई आधारित डायग्नोसिस टूल्स और रोबोटिक सर्जरी का चलन निरंतर बढ़ रहा है। टेलीमेडिसिन और स्वचालित स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं से पारंपरिक डॉक्टरों और कर्मचारियों की मांग में बदलाव देखने में आ रहा है। इसी तरह से ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में भी स्वचालित वेयरहाउस, रोबोटिक्स और ड्रोन डिलीवरी जैसी तकनीकों से श्रमिकों की मांग कम हो रही है। एआई आधारित कस्टमर सपोर्ट और चैटबॉट्स ने कॉल सेंटर नौकरियों को काफी हद तक प्रभावित किया है।
हालांकि, एआई और ऑटोमेशन केवल नौकरियों को खत्म ही नहीं कर रहे, बल्कि नए रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहे हैं, जैसे डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे नए क्षेत्रों में पेशेवरों की अत्यधिक मांग है। सरकार और निजी संस्थाएं ढेरों स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम चला रही हैं ताकि लोग नई तकनीकों से जुड़ सकें। एआई आधारित उत्पादों के डेवलपर, रोबोटिक्स इंजीनियर, साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ और डिजिटल मार्केटिंग जैसी नई नौकरियाँ उभर रही हैं। भारत में स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी कंपनियों को एआई आधारित समाधान विकसित करने के लिए कुशल पेशेवरों की आवश्यकता है। अब इंसान और मशीन मिलकर हाइब्रिड वर्क मॉडल के तहत काम कर रहे हैं, जिससे नए प्रकार की नौकरियों का जन्म हो रहा है।
इस तेज़ी से बदलते हुए माहौल में सरकार, और बहुत सी निजी कंपनियां एक बहुत बड़ी भूमिका निभा रही हैं, जिनमे विशेष रूप से शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना, नए स्टार्टअप और निवेश का माहौल बनाना और साथ ही आसान नीतियाँ एवं कानून को लागू करना है। भारत सरकार अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग पर आधारित विभिन्न कोर्स और प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रही है। डिजिटल इंडिया और स्किल इंडिया जैसी योजनाओं से युवाओं को नई तकनीकों से जोड़ा जा रहा है। सरकार और निजी कंपनियाँ मिलकर एआई स्टार्टअप्स को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे नए रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। इनके साथ-साथ, सरकार को ऐसी नीतियाँ बनानी होंगी जो ऑटोमेशन से प्रभावित लोगों को सुरक्षा प्रदान कर सकें। न्यूनतम वेतन, श्रमिक अधिकार और बेरोजगारी भत्ते जैसी योजनाओं को भी लागू करने की आवश्यकता है।
एआई और ऑटोमेशन भारत की अर्थव्यवस्था को यकीनी तौर पर बदल रहे हैं। हालांकि, इससे कुछ पारंपरिक नौकरियां खत्म तो हो रही हैं, लेकिन यह भी सच है कि नए अवसर भी तेजी से उभर रहे हैं। सरकार, उद्योगों और शिक्षा प्रणाली को मिलकर काम करना होगा ताकि लोग इस बदलाव के लिए तैयार हो सकें। यदि उचित दिशा में कदम उठाए जाएं, तो भारत न केवल इस तकनीकी क्रांति में लंबे समय तक अग्रणी भूमिका निभा सकता है, बल्कि अन्य देशों के लिए मार्गदर्शक भी बन सकता है। सच तो यह है कि एआई से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि इसे समझकर और अपनाकर निरंतर आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
लेखक –
डा. निखिल गोविल
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